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हाथरस कांड में एक के बाद एक नए माेड़, ‘ऑनर किलिंग’ थ्याेरी की तरफ इशारा

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हाथरस। हाथरस पीड़िता के साथ गैंगरेप और मौत को लेकर देश का गुस्सा कम नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे भयानक बताते हुए योगी सरकार से सवाल पूछे हैं। विपक्ष लगातार हमलावर है। इस बीच इस केस में आए दिन नए दावों से मामले में नया मोड़ आता जा रहा है। आरोपी और पीड़ित पक्ष के बीच कॉल डीटेल रेकॉर्ड सामने आने के बाद अब जेल में बंद चारों आरोपियों ने खुद को बेकसूर बताते हुए ‘ऑनर किलिंग’ का सनसनीखेज दावा किया है। आरोपियों का कहना है कि पीड़िता को उसकी मां और भाई ने मारा है। वहीं पीड़िता के परिजनों चिट्ठी पर कहा कि आरोपी सजा से बचने के लिए यह दांव चल रहे हैं।

हाथरस कांड में जेल में बंद चार आरोपी संदीप, रवि, लवकुश और रामू की तरफ से एसपी को एक चिट्ठी भेजी गई है। इस चिट्ठी में आरोपियों ने दावा किया है उनपर लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं और उन्हें गलत ढंग से जेल में बंद किया गया है। मुख्य आरोपी संदीप ने दावा किया है कि उसकी पीड़िता से दोस्ती थी लेकिन पीड़िता के परिवार को यह दोस्ती पसंद नहीं थी।

वीडियाें के बाद मामलें में नया माेड़

हाथरस गैंगरेप कांड की जांच लगातार जारी है. इस बीच पुलिस की जांच का एक वीडियो सामने आया है, जो कि गैंगरेप की घटना वाले दिन का ही बताया जा रहा है. 14 सितंबर को शूट हुआ ये वीडियो घटना के ठीक बाद का है. जिसमें खेत के इलाके में सामान फैला हुआ है जो ये साबित करता है कि घटना के वक्त वहां पर कई लोग मौजूद थे. 

आपको बता दें कि 14 सितंबर को ही पीड़िता के घर से कुछ दूरी में खेत के इलाके में गैंगरेप की घटना हुई थी. यूपी पुलिस का दावा है कि ये वीडियो उसी दिन का है. साथ ही ये भी कहा गया है कि जब घटना हुई तो पीड़िता की मां कुछ ही दूरी पर थी, ऐसे में उनके पास तक आवाज पहुंच सकती थी.

वीडियो में पता लगता है कि वहां पर 4 हसियां मिली हैं, इसके अलावा चप्पल और अन्य सामान मिला है. जो साबित करता है कि घटना के वक्त वहां पर कई लोगों की मौजूदगी थी. अब इस वीडियो के सामने आने के बाद यूपी पुलिस का कहना है कि सबूत के तौर पर इसे सीबीआई को सौंपा जाएगा, ताकि घटना के बाद की स्थिति की जानकारी जांच एजेंसी को मिल सके.

पुलिस के मुताबिक, जब घटना हुई तो उसके बाद मौके पर पुलिस को बुलाया गया. जब पुलिस पहली बार घटना स्थल पर पहुंची थी, तो उस वक्त ही ये वीडियो शूट किया गया था.

गौरतलब है कि हाथरस के गांव में 14 सितंबर को ये घटना हुई थी, जिसके बाद पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यूपी सरकार के मुताबिक, शुरुआती दिन में ही गैंगरेप की बात पीड़िता ने नहीं बताई थी. हालांकि, कुछ वक्त बाद पीड़िता ने इस बारे में बयान दिया था. उसके बाद पीड़िता को दिल्ली के अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, जहां 29 तारीख को उसकी मौत हो गई थी.

हाथरस की घटना में कथित गैंगरेप और मारपीट के आरोपियों ने हाथरस पुलिस कप्तान को चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में आरोपियों ने पीड़िता से मारपीट और गैंगरेप के आरोपों को ‘झूठा’ बताया और कहा कि ‘हमें फंसाया गया है’।

 मुख्य आरोपी ने पीड़िता से ‘दोस्ती’ की बात कबूली

 उसने कहा कि ‘मेरी पीड़िता से फोन पर कभी कभी बातचीत होती थी, लेकिन ये बात पीड़िता के घरवालों को पसंद नहीं थी।’ आरोपी ने कबूला के ‘घटना के दिन खेत पर पीड़िता से मुलाकात हुई थी, इसके बाद वो अपने घर चला गया था। लेकिन दोनों की दोस्ती ने नाराज पीड़िता की मां और भाई ने पीड़िता से मारपीट की, जिससे उसे गंभीर चोट आईं और उसकी मौत हो गई।’

मुख्य आरोपी ने कहा कि ‘कभी भी पीड़िता के साथ गलत काम नहीं किया, उसे बाकी तीन आरोपियों के साथ ‘गलत फंसाया’ गया है।’ एसपी को लिखी चिट्ठी में चारों आरोपियों ने ‘खुद को निर्दोष बताया और सही जांच करा के इंसाफ दिलाने की मांग की है।’

हाथरस केस में अहम सुनवाई 

वही हाथरस मामले में पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अर्जी दाखिल की गई है। आपको बता दें कि यूपी सरकार पहले ही पीड़ित परिवार की सुरक्षा पुख्ता कर चुकी है, बूलगढ़ी गांव में पुलिस की तैनाती है और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। 

लेकिन PIL में मुख्य रूप से हाथरस मामले की सीबीआई जांच, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने और मृतका के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की गई है। हालांकि ये तीनों ही मांगें यूपी सरकार पहले ही पूरी कर चुकी है। अब देखना है कि इस मामले में कोर्ट क्या निर्देश देता है।

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