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दिल्ली में कोरोना लॉकडाउन के बाद खुले मॉल, रेस्त्रां और धर्मस्‍थल 50 दिन बाद भी बेरौनक

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नई दिल्ली । जिन मॉल में वीकेंड पर पार्किंग खाली नहीं मिलती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा है। करीब 50 दिन हो गए दिल्ली-एनसीआर में रेस्टोरेंट और मॉल का शटर उठे मगर रौनक यानी जनता नहीं है। बहुत तैयारियों और एहतियात बरतने के बावजूद लोग कतरा रहे हैं। कई दुकानदारों के लिए खुद को बाजार में बनाए रखना भी चुनौती बन गई है। एक रिपोर्ट-

वीथ्रीएस मॉल : दीपावली तक सुधरेंगे हालात

images (3)_large.jpg - V3S Mall, New Delhi - Tripadvisor


वीथ्रीएस मॉल में प्रवेश के लिए सख्त नियम नजर आ रहे हैं। गेट पर आरोग्य सेतु एप देखकर प्रवेश दिया जा रहा है। बाहर परिसर में कुछ लोग नज़र आ रहे थे, लेकिन मॉल के अंदर सन्नाटा था। कुछ बड़े स्टोर में इक्का-दुक्का ग्राहक नजर आ रहे थे। पहले लोगों से पटे रहने वाले बड़े स्टोर से वह भीड़ गायब है। एक बड़े स्टोर के मैनेजर प्रदीप ने बताया कि अनलॉक होने के बाद से कुछ हालात सुधरे हैं। पिछले कुछ दिनों से लोग मॉल में आ रहे हैं, लेकिन अभी भी मॉल कल्चर के लिहाज से हालात सामान्य नहीँ हुए हैं। मॉल से लोगों ने दूरी बनाई हुई है। अब भी हमें पिछली रौनक लौटने का इंतजार हैं। उम्मीद है कि दीपावली से पहले वह रौनक फिर लौटेगी।

क्रॉस रीवर मॉल : बच्चों के मनोरंजन के साधन बंद
राजधानी के पूर्वी दिल्ली स्थित सबसे बड़े मॉल क्रॉस रीवर में आने वाले ग्राहकों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम है। शनिवार को पहले यहां दोपहर से ही भीड़ हो जाती थी, लेकिन शाम 4 बजे भी यहां आने वालों की संख्या बहुत अधिक नहीं थी। बच्चों के मनोरंजन के सभी साधन बंद हैं, इसलिए यहां परिजन बच्चों के साथ कम ही आ रहे हैं। इस मॉल के मुख्य सुरक्षा अधिकारी अनंत पाल सिंह का कहना है कि मॉल में शाम को लोगों की संख्या अधिक रहती है, लेकिन पहले जैसी स्थिति नहीं है। कपड़े, ग्रासरी और अन्य दुकानें खुली रहती हैं। सिनेमाहाल अभी बंद हैं। यहां आने वाले ग्राहकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान दिया जा रहा है। मास्क और सेनेटाइजर का प्रयोग किया जा रहा है।

गुरुद्वारा बंगला साहिब : सेवादार संभाव रहे मोर्चा

Sikh kitchens feed New Delhi's masses in virus lockdown | Covid-19 ...

गुरुद्वारा बंगला साहिब में कोरोना से बचाव के लिए बाहर प्रभावी उपाय अपनाया जा रहे हैं। बाहर सेनेटाइजर टनल नज़र लगा है। वहीं सिर पर रुमाल व मुंह मे मास्क के साथ प्रवेश दिया जा रहा। इसके बाद भी श्रद्धालुओं की संख्या समिति नज़र आ रही है। हालांकि, ग्रुप में आये कुछ श्रद्धालुओं नज़र आ रहे थे। लेकिन पहले की संख्या में यह बेहद कम था। सामाजिक दूरी के नियम का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सेवादार मुस्तैद दिखे। नियम टूटने की आंशका के पहले ही नियम का पालन सुनिश्चित कराने के लिए लोगों के पास पहुंच रहे थे। गुरुद्वारा बंगला साहिब के प्रबंधक सरदार परमजीत सिंह चंडोक के मुताबिक धीरे -धीरे श्रद्धालाओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि सामान्य दिनों की तुलना में यह बेहद कम है। पहले एक दिन में 40 हजार तक श्रद्धालु पहुंच जाते थे, अब 2 हजार के करीब इनकी संख्या है।

जामा मस्जिद : नमाज में आने वाले 100 के करीब थे
जामा मस्जिद भले ही बंद होने के बाद दोबारा खोल दी गई हो लेकिन यहां भीड़ नजर नहीं आई। यहां अधिक लोग नमाज के लिए न जुटे इसके लिए इमाम अहमद बुखारी ने पहले ही अपील की थी। दूरी का पूरा ध्यान मस्जिद प्रशासन रख रहा है। इसलिए यहां पर रेखा बनाई गई और एहतियात के लिए पूरा इंतजाम है। शनिवार को भी दोपहर की नमाज में आने वालों की संख्या 100 से भी कम थी। यहां के मुफ्ती उवेज खान ने बताया कि मस्जिद में आने वाले लोगों की संख्या काफी कम है। कोरोना के कारण यहां पर पर्यटक भी कम आ रहे हैं। कोरोना से बचाव के लिए लोगों को निर्देश जारी किए गए हैं। स्थानीय लोग भी कम संख्या में नमाज अदा करने आते हैं और चले जाते हैं।

कालकाजी मंदिर : 10 फीसदी श्रद्धालु ही मंदिर पहुंच रहे
अनलॉक में मिली रियायत के बाद शनिवार को कालकाजी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले थे। लेकिन कोरोना के डर से श्रद्धालु न के बराबर मंदिर में दिखाई पड़े। मंदिर परिसर में सन्नाटा था। कालकाजी मंदिर के महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने बताया कि मंदिर में दस फीसदी श्रद्धालु ही पहुंच रहे हैं। शनिवार और रविवार को मंदिर में जिस तरह पहले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था। वैसे नजारा नहीं है। अब तस्वीर बदल चुकी है। मंदिर में श्रद्धालुओं को केवल दर्शन की इजाजत है। सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। बिना मास्क और हाथों को सेनेटाइजेशन किए श्रद्धालुओं को अंदर जाने नहीं दिया जाता है। वहीं कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत सुरेश शर्मा ने बताया कि मंगलवार के दिन 25 फीसदी श्रद्धालुओं दर्शन के लिए पहुंचते है बाकी दिनों में यह संख्या दस फीसदी है। आसपास के इलाकों के श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन के लिए आ रहे हैं। एनसीआर इलाके से पहले जो श्रद्धालु आते थे उनकी संख्या अब बिल्कुल नहीं है।

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