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नागरिकता कानून के विरोध पर विपक्षी रणनीति में दरार, माया, ममता और केजरीवाले ने बनाई दूरी

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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ देशभर में प्रदर्शनों के बीच साझा रणनीति बनाने के लिए कांग्रेस ने समान विचारधारा वाली सभी पार्टियों को सोमवार को होने जा रही बैठक में बुलाया है. सीएए के खिलाफ एक संयुक्त रणनीति बनाने के लिए और छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बरता के विरोध में सभी विपक्षी दल आज दोपहर दो बजे संसद उपभवन में बैठक करेंगे. कांग्रेस के निमंत्रण पर कई पार्टियां इस बैठक में शिरकत कर रही हैं, लेकिन कुछ ने दूरी भी बना ली है.

इस बैठक में कांग्रेस के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम), समाजवादी पार्टी, आरजेडी, लेफ्ट, एयूडीएफ और अन्य दल हिस्सा ले रहे हैं.  जबकि तीन प्रमुख दलों ने इस बैठक से दूरी बना ली है. सीएए के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज उठाने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस की बैठक से खुद को अलग कर लिया है. ममता बनर्जी ने नागरिकता कानून को न सिर्फ बंगाल में लागू करने से मना किया है, बल्कि वो खुद सड़कों पर उतरकर इसका विरोध कर रही हैं. बावजूद इसके ममता ने विपक्ष की बैठक से खुद को अलग कर लिया है.

मायावती ने दिया राजस्थान का हवाला

ममता बनर्जी के अलावा बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती ने भी विपक्ष की एकजुटता को झटका दिया है. हालांकि, उन्होंने बैठक से बीएसपी को दूर रखने का अलग कारण बताया है. मायावती ने बैठक में शामिल न होने की वजह राजस्थान में बीएसपी विधायकों को कांग्रेस में शामिल करना बताया है. मायावती ने इस संबंध में कई ट्वीट किए हैं. उन्होंने ट्ववीट में लिखा, ‘राजस्थान कांग्रेसी सरकार को बीएसपी का बाहर से समर्थन दिये जाने पर भी, इन्होंने दूसरी बार वहां बीएसपी के विधायकों को तोड़कर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है जो यह पूर्णतयाः विश्वासघाती है. ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व में आज विपक्ष की बुलाई गई बैठक में बीएसपी का शामिल होना, यह राजस्थान में पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने वाला होगा. इसलिए बीएसपी इनकी इस बैठक में शामिल नहीं होगी.’

हालांकि, सीएए पर भी मायावती ने अपनी राय रखी. उन्होंने ट्वीट में बताया कि  बीएसपी CAA-NRC के विरोध में है और उसने केन्द्र सरकार से पुनः अपील है कि वह इस विभाजनकारी व असंवैधानिक कानून को वापिस ले.

बीएसपी के अलावा दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने भी विपक्ष की इस बैठक से खुद को अलग कर लिया है. दिल्ली में चुनाव होने जा रहे हैं और आम आदमी पार्टी सीएए-एनआरसी और यूनिवर्सिटी में चल रही हिंसा की घटनाओं से दूरी बनाए है. देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर विपक्ष की बैठक का हिस्सा न बनकर आम आदमी पार्टी ने फिर एक बार अपने स्टैंड को जाहिर कर दिया है.

बता दें कि इन तीनों ही दलों ने संसद के अंदर भी नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया था, लेकिन कांग्रेस द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक से तीनों ने ही खुद को अलग कर लिया है.


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