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अंतरजातीय विवाह के प्रति बढ़ा रुझान, आंकड़े देते हैं गवाही

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नई दिल्ली। साल की शुरुआत से सितंबर तक राजधानी में 19250 शादियां हुईं। इनमें से 589 अंतरजातीय विवाह हुए। इस दौरान 11 जिलों में सर्वाधिक 2339 शादियां दक्षिण पश्चिम जिले में हुई। इसके बाद उत्तर पश्चिम में 2222, शाहदरा में 1192 विवाह पंजीकृत हुए। समाज में तेजी से हो रहे बदलाव का असर शादियों पर भी दिखने लगा है। इस दौरान 589 अंतरजातीय विवाह हुए, जबकि इससे पहले के तीन वर्षों में हर साल औसतन 355 अंतरजातीय विवाह पंजीकृत किए गए।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले नौ महीने के दौरान मध्य दिल्ली 1800, उत्तरी दिल्ली 1586, पूर्वी दिल्ली 1461, दक्षिण पूर्व जिले में 1423, नई दिल्ली में 1019, जबकि उत्तर पूर्व जिले में सबसे कम 318 शादियां इस दौरान पंजीकृत हुई हैं। पश्चिमी दिल्ली में 409 सिख जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। 

दिल्ली सरकार के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान 14961 शादियां हिंदू विवाह अधिनियम, जबकि आनंद विवाह अधिनियम के तहत 947 सिख युगल जोड़ों की शादियां हुईं। सितंबर तक अलग-अलग जिलों से शादियों के लिए 20884 अर्जियां दी गई थीं, जिनमें से 19254 का पंजीकरण हो चुका है। 

राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर तक 589 विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत पंजीकृत किए गए। इसके तहत युवक-युवती की आपसी सहमति से (अंतरजातीय) शादियां हुईं, लेकिन किसी जाति या धर्म विशेष के नियमों के पालन की पाबंदी नहीं थी।

दोनों अगर बालिग हैं और कुछ अपवाद के मामलों से अलग हैं तो किसी भी जाति या धर्म में शादी कर सकते हैं। 2016 से 2018 के दौरान स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कुल 1063 शादियां यानी औसतन 355 शादियां हर साल पंजीकृत हुईं।

विभागीय अधिकारी के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों के दौरान अंतरजातीय शादियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 21 साल के युवक और 18 साल की युवती अगर परिणय सूत्र में बंधते हैं तो शादी का पंजीकरण अनिवार्य है।

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