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मेडिकल पीजी के लिए अब जिला अस्पतालों में तीन महीने की प्रैक्टिस अनिवार्य

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नई दिल्ली। देशभर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की पढ़ाई के दौरान छात्रों के लिए जिला अस्पतालों में तीन महीने की प्रैटिक्स अनिवार्य की जाएगी। इसके बाद ही मेडिकल पीजी पूरी होगी। इसके लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) जल्द ही अधिसूचना जारी करने वाली है। अगले सत्र से निजी व सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए यह व्यवस्था लागू होगी।

प्रयोग सफल रहा तो बढ़ाई जा सकती है सेवा अवधि

इसका फायदा यह होगा कि जिला अस्पतालों में इमरजेंसी ड्यूटी, वार्ड ड्यूटी व ओपीडी के लिए डॉक्टर मिल जाएंगे। एमसीआइ का यह प्रयोग सफल रहा तो आगे चलकर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी पीजी डॉक्टरों को तीन से छह महीने के लिए पदस्थ किया जाएगा। इसका मकसद यह है कि डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को अच्छे से समझ सकें।

अधिसूचना जल्द जारी होगी

एमसीआइ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन डॉ. वीके पॉल ने कहा किपीजी छात्रों को तीन महीने के लिए जिला अस्पतालों में पदस्थ किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अधिसूचना जारी होने वाली है।

ढाई हजार से ज्यादा एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई गईं 

1956 से देश में मेडिकल शिक्षा की निगरानी करने वाले एमसीआइ में फैले भ्रष्टाचार, उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और अदालत के आदेशों के खुलेआम उल्लंघन को देखते हुए सरकार ने पिछले साल सितंबर में एमसीआइ को भंग कर दिया था और उसके कामकाज को देखने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन कर दिया था।

इसके साथ ही संसद की स्थायी समिति के सुझाए संशोधनों के अनुरूप एक नया संशोधन विधेयक संसद से पास किया गया था। पहली बार एक साल में ढाई हजार से ज्यादा एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई जा सकी हैं। यही नहीं, सरकार ने 75 जिलों में नए मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा की है। 

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