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दहेज हत्या के मामले में झूठी पटकथा लिख पुलिस ने निर्दोषों को भेजा जेल

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  • अदालत के कटघरे में खड़ी रही पुलिस विवेचना
  • पुलिस ने मकान मालकिन को बनाया युवक की मां
  • सवा चार साल बाद अदालत ने किया दोष मुक्त

प्रदीप वर्मा

गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस ने दहेज हत्या और दहेज उत्पीड़न के एक मामले में ऐसी झूठी पटकथा लिखी जिसकी अदालत में धज्जियां उड़ गई। पुलिस ने एक ऐसी महिला को दहेज हत्या के आरोपी पति की मां बना दिया जिसका उससे दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं था यही नहीं कमजोर विवेचना की वजह से अभियोजन पक्ष अदालत में यह भी साबित नहीं कर पाया की जिस महिला की मौत 2014 में हुई उसकी शादी आरोपी से हुई भी थी या नहीं। पुलिस की झूठी पटकथा की वजह से एक निर्दोष युवक को 4 साल तक सलाखों के पीछे काटने को मजबूर होना पड़ा। फिलहाल अदालत ने तथाकथित आरोपी पति व उसकी तथाकथित मां को दोषमुक्त करार दिया है।

मामला लोनी थाना क्षेत्र का है जो अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सत्य प्रकाश त्रिपाठी की अदालत में चल रहा था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सेवाराम वर्मा ने बताया कि बहता हाजीपुर के राहुल गार्डन में रहने वाले अर्जुन की पत्नी रामवती की दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। इस मामले में मृतका के पिता राम सिंह निवासी कल्लू पुरा जिला रामपुर में दहेज उत्पीड़न दहेज हत्या और वैकल्पिक धारा के तौर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले में अर्जुन व उसकी तथाकथित सरला को नामजद कराया। इस मामले की जांच तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी अरविंद कुमार यादव के द्वारा की गई। रिपोर्ट के आधार पर ही जांच अधिकारी ने दोनों नामजद अभियुक्तों के खिलाफ 5 नवंबर 2011 को चार्जसीट लगाकर अदालत में दाखिल कर दी।

अधिवक्ता सेवाराम वर्मा

बचाव पक्ष के अधिवक्ता सेवाराम वर्मा ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में अपनी तरफ से जांच करने की थोड़ी सी भी कोशिश नहीं की। जिसकी वजह से निर्दोष लोगों को जेल में रहना पड़ा। इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 9 लोगों ने गवाही दी जबकि बचाव पक्ष की ओर से तीन लोगों ने अपने बयान दर्ज कराएं। दोनों पक्षों के जिले सुनने के बाद अदालत ने 23 मार्च 2019 को इस मामले में अपना फैसला सुनाया। न्यायाधीश सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने मुख्य आरोपी अर्जुन व उसकी तथाकथित मां सरला को धारा 498 ए, 304 बी आईपीसी व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम, वैकल्पिक धारा 302, धारा 34 आईपीसी के अपराध के आरोपी को दोष मुक्त किया। यही नहीं 4 साल से जेल में बंद अर्जुन को भी अदालत ने जेल से रिहा करने के आदेश दिए।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता सेवाराम वर्मा ने बताया कि पुलिस ने नामजद आरोपी अर्जुन के मामले में जांच करना बिल्कुल भी मुनासिब नहीं समझा केवल एफआईआर के आधार पर ही पुलिस ने मनगढ़ंत कहानी बनाकर चार्जशीट दाखिल कर दी। जबकि अदालत में इस बात का खुलासा हुआ कि सरला आरोपी अर्जुन की मां थी ही नहीं। अर्जुन का परिवार दिल्ली दिल्ली में रहता है और उसके पिता विनोद कुमार जयसवाल व माता प्रभावती है। जिन्होंने अर्जुन को अपना पुत्र बताते हुए अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत में सुनवाई के दौरान यह भी प्रकाश में आया कि सरला के पति की मृत्यु हो चुकी थी जिसकी वजह से वह अर्जुन को ही अपना पुत्र की तरह मानती थी। यही नहीं 22 दिन तक रामवती का इलाज जीटीबी अस्पताल में चला लेकिन इस दौरान लड़की के मायके वालों की ओर से कोई भी शख्स अस्पताल में नहीं आया जिसका लाभ आरोपी पक्ष को मिला और अदालत ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। लेकिन गंभीर बात यह है कि पुलिस की कमजोर जांच की वजह से एक निर्दोष को 4 साल तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा। साथ ही एक निर्दोष महिला को भी जेल की सजा भुगतनी पड़ी, जो पुलिस के लिए बेहद शर्मनाक बात है।

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