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बाल श्रम कानून और चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रही कांग्रेस प्रत्याशी डोली शर्मा

गाजियाबाद। गाजियाबाद लोकसभा सीट पर किस्मत आजमा रहे 12 उम्मीदवारों में से एकमात्र महिला प्रत्याशी डोली शर्मा अपने चुनाव प्रचार में बाल श्रम कानून और चुनावी आचार संहिता की धज्जियां उड़ाती हुई दिख रही है। कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं कि चुनावी प्रबंधन का काम देख रहे सिपहसालार पैसे का लालच देकर साहिबाबाद की मलिन बस्ती समेत मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बच्चों से चुनाव प्रचार कर आ रहे हैं, जो सीधे-सीधे केंद्र और राज्य सरकार के साक्षरता अभियान को पलीता लगाने से कम नहीं है।

गाजियाबाद लोकसभा सीट पर  कांग्रेस प्रत्याशी डोली शर्मा एकमात्र महिला प्रत्याशी हैं, जो 12 उम्मीदवारों के बीच डटी हुई है। अगर उनकी शैक्षिक योग्यता की बात करें तो वह एमबीए की पढ़ाई किए हुए हैं। कहावत है कि जब एक महिला साक्षर होती है तो वह 3 पीढ़ियों को साक्षर बनाने का दम रखती है। लेकिन 2019 के गाजियाबाद के चुनावों में कुछ अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। गाजियाबाद के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में छोटे-छोटे बच्चे कांग्रेस की टोपी और पटका डालकर कांग्रेस प्रत्याशी डोली शर्मा को वोट देने की मांग कर रहे हैं। गाजियाबाद लोकसभा सीट के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में इस तरह का नजारा देखने को मिल रहा है। बच्चों के मुताबिक उन्हें पैसे का लालच देकर “अंकल’ ने चुनाव प्रचार करने के लिए कहा है।
आपको बता दें कि स्कूलों के चुनाव परिणाम के बाद अब लगभग सभी स्कूल दोबारा से खुल गए हैं और उन्हें पढ़ाई भी शुरू हो गई है। ऐसे में जिन हाथों में पेंसिल, पेन, किताबें होनी चाहिए थी, अब वही बच्चे कांग्रेस प्रत्याशी के लिए नारे लगा रहे हैं और पैसों के लालच में उनके लिए वोट मांग रहे हैं। इसे बाल श्रम का उल्लंघन कहें या चुनाव आचार संहिता की खुली धज्जियां उड़ाना। यह तय करना है गाजियाबाद के जिला प्रशासन को, कि वह आदर्श आचार संहिता 2019 का काला पालन कर आता है या फिर देश के भविष्य के हाथ में राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह देकर साक्षरता अभियान में कील ठुकवाता आता है।

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