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क्रिकेटर हरभजन ने दिखाया आईना, खेल से पहले जताई देशभक्ति

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सत्यपाल चौधरी

राजनीतिक लोगों के सवाल तो यकीनन चुनावी फायदे नुकसान के इश्यू बन जाएंगे, लेकिन गैर राजनीतिक अन्य क्षेत्रों में सक्रिय ब्रांडेड शख्शियतों के बयानों की, विचारों की अपनी साख है। देश पर हुए आतंकी अटैक पर मशहूर क्रिकेटर हरभजन सिंह के विचार सुने। लगा कोई सच्चा भारतीय नागरिक बिना लाग लपेट के बोल रहा है। वंदे मातरम, भारत माता की जय और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे ना तो शहीद हुए करीब 45 जवानों की शहादत को सम्मान प्रदान कर पा थे, ना जवान खो चुके परिजनों को कोई समाधान और सम्मान दे पा रहे, ना ऐसी घटनाओं की पुनरावृति पर रोक का कोई रास्ता बना पाए।

हरभजन ने आतंक से तबाह होते मध्यम वर्गीय परिवारों के जवानों, सेना पर युद्ध के अनचाहे बोझ, शांति और राजनीतिक फायदे के लिए जवानों की लाशों के बेजा इस्तेमाल को संजीदगी से उठाया। एक टीवी के खेल प्रोग्राम में हिस्सा ले रहे हरभजन ने कहा कि आतंकी घटना की गहनता से जांच हो, सुरक्षा तंत्र मजबूत हो, पाकिस्तान से दूरी बनाई जाए, आतंकी घटना में मारे गए जवानों को शहीद का दर्जा मिले, मारे गए जवानों के परिजनों को पेंशन और सरकारी संरक्षण मिले और आतंक और युद्ध के बजाय शांति का माहौल पैदा करके देश कैसे आगे बढ़े इस पर योजना तैयार हो। इसी कार्यक्रम में पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने पाकिस्तान से वर्ल्ड कप खेलने और उसमे हराने की बात कही, लेकिन हरभजन ने गावस्कर की बात काटते हुए मसले का समाधान होने तक पाक से खेल सम्बन्ध स्थगित करने की बात की और कहा कि खेल खिलाड़ियों का करियर है। लेकिन करियर से पहले देश होना चाहिए।

हरभजन की दलील सुनकर लगा कि मुद्दे और समस्या को सुलझाने के लिए वाकई समझ भी जरूरी है, लेकिन टीवी चैनल की टें-टे के बीच और सत्ता पक्ष और विपक्ष के आरोप प्रत्यारोप के बीच कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि इस अटैक की जांच क्यों ना हो और हमारे जवानों को सरकार शहीद का दर्जा क्यों नहीं दे रही और मारे गए जवानों के परिजनों को सरकार आश्रय की घोषणा क्यों नहीं कर रही। टीवी चैनल और सत्तारूढ़ पार्टी के लोग तो इन सवालों को उठाते ही प्रधानमंत्री के बचाव में उतर कर चोर की दाढ़ी में तिनका वाली कहावत सिद्ध कर रहे हैं। सवाल जवाब के तीर चलेंगे तो निश्चित ही हुकूमत को ही कठघरे में खड़ा होना पड़ेगा। चूक,लापरवाही और समाधान का जवाब आखिर कौन देगा? सवालों से झुंझुला कर आप भाग नहीं सकते हो। हरभजन के सवाल देश के आम नागरिकों के सवाल हैं किसी राजनीतिक दल के नहीं। इसलिए जरूरी है कि आतंक का समाधान हो इस पर राजनीतिक फायदा और नुकसान नहीं देखना चाहिए।

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