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अमेरिका के बाद अब रूस ने भी मिसाइल संधि से खुद को अलग करने का किया ऐलान

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मॉस्को। शीत युद्ध के जमाने की एक महत्वपूर्ण मिसाइल संधि से अमेरिका के पीछे हटने की घोषणा के एक दिन बाद शनिवार को रूस भी इससे अलग होने का ऐलान कर दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उनका देश भी इस प्रमुख संधि से खुद को अलग कर रहा है। उन्होंने 1987 में हुई ‘मध्यम दूरी की मारक क्षमता वाली परमाणु बल संधि’ (इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्स ट्रीटी यानी INF संधि) पर कहा, ‘हमारे अमेरिकी साझेदारों ने समझौते में अपनी भागीदारी को स्थगित करने की घोषणा की है और हम भी अपनी भागीदारी स्थगित कर रहे हैं।’

पुतिन ने विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव और रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ बैठक के दौरान कहा कि रूस अब निस्त्रीकरण पर अमेरिका के साथ बातचीत की पहल नहीं करेगा। राष्ट्रपति ने कहा, ‘हम तब तक प्रतीक्षा करेंगे जब तक हमारा साझेदार इस महत्वपूर्ण विषय पर हमारे साथ समान और सार्थक वार्ता करने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं हो जाता।’

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि उनका देश आईएनएफ संधि के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को स्थगित कर रहा है और 6 महीने में इससे अलग होने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। अमेरिका ने कहा कि रूस की मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली ने आईएनएफ संधि का उल्लंघन किया है। लेकिन रूस कहता आ रहा है कि वह संधि का उल्लंघन नहीं करता है। पिछले महीने उसने विवादित हथियार प्रणाली पर जानकारी देने के लिए पत्रकारों और विदेशी सैन्य अधिकारियों को आमंत्रित किया था। 

पुतिन ने अतीत में धमकी दी थी कि अगर आईएनएफ को रद्द किया जाता है तो रूस इस संधि के तहत प्रतिबंधित परमाणु मिसाइल को विकसित करेगा। पुतिन ने यह भी कहा है कि यह संधि तोड़ने के बाद अगर अमेरिका यूरोप में अधिक मिसाइलें लगाने के लिए कदम उठाता है तो रूस भी उसी तरह से जवाब देगा और अगर यूरोप का कोई भी देश अपने यहां अमेरिकी मिसाइलें लगाने के लिए सहमति देता है तो उसपर रूसी हमले का खतरा मंडराएगा। 

बता दें कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्बाच्योफ द्वारा शीत युद्ध की समाप्ति के लिए इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह संधि 500 से 5,500 किलोमीटर दूरी तक मारक क्षमता वाली जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों पर प्रतिबंध लगाती है। इस संधि से पश्चिमी देशों पर सोवियत संघ के परमाणु हमले के खतरे को खत्म कर दिया था लेकिन यह संधि चीन जैसी अन्य बड़ी सैन्य शक्तियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाती है।

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